हैरान मत होना

 टूटेगा वर्चस्व एक दिन,
उन्माद में मत आना।
दबी जुबान खुलेगी तो,
खंज़र सिर पर नाचेंगे ।।
सबल को दुर्बल बनाने का,
मत करना प्रयास अधिक।
एक दिन सक्षमता तेरी,
तेरा ही अंत कर डालेगी।।
रावण की विद्धता जब,
घमंड से हुई थी चूर।
कौन है इतना बड़ा?
तानाशाह बन बैठ गया ।।
धूर्तता व चालाकी से,
लक्ष्य प्राप्त को चला ।
न मालूम इस लीला का,
पल भर में क्या रास रचा ।।
कलम के कोमल हाथों को,
रक्तरंजित को विवश करता,
पश्चाताप का न मिलेगा मौका,
हैरान मत होना ऐ दोस्त,
तुझे भी न्याय मिल जायेगा ।।।

*कविताएँ*

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