कोई नही आया !!!




हम अब तक हैं क्यों तन्हा?
खुद भी न समझ पाए हैं।
पल्लवित होती कलियाँ
बहलाने लगी थी दिल को मेरे,
हर पल उनके निकट होते ही
दूर बहुत हो जाते हैं।
मन मसोस कर रह जाते,
आंसू भी न गिर पाते हैं।
भरी भीड़ में हम वही ,
फिर तन्हा रह जाते हैं।
प्यार की निगाहों को ,
अब भी न पहचान पाये हैं।
उम्र का गुजर चुका एक दौर।
हाथ मलते ही रह गए।
आस सिर्फ एक लगाई।
आएगी दिल मेरा बहलायेगी।
न ही ऐसा तूफ़ान आया ,
न भंवर में  डूबा,
गाँव से लेकर शहर तक 
अकेला राह चलता रहा।
*कविताएँ*

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